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बड़े दबाव में हैं शहर

सूरज की किरणों ने जैसे ही धरती को छुआ, हर कोई जाग उठा। धीमी आवाज तेज होती चली गई और फिर दौड़ने लगे शहर, गांव और जंगल। नेचर को अपनी सभी कृतियों से स्नेह है, चाहे वह धरती हो या उस पर जन्म लेने वाले इंसान या फिर किस्म-किस्म के जीव, जंतु, पेड़-पौधे, नदियां, ताल और सागर। उसने तो धरती, समुद्र और पहाड़ों की रचना की थी। 
एक समय धरती पर वनों का राज था और इंसान भी उसी में रहते थे। इंसानों ने वनों को काटकर अपनी बस्तियां बसा लीं। फिर इनसे गांव और धीरे-धीरे शहर का आगमन हो गया। जो थोड़ा आगे बढ़ा और आधुनिक होेने लगा, उसे शहर कहा जाने लगा। जो अभी भी प्रकृति के साथ रचा बसा था, वह गांव कहा जाता था। जो बलिदान देकर इन दोनों के जन्म का साक्षी रहा, वह जंगल था और आज भी वैसा ही दिखता है, जैसा पहले था।
परिवर्तन प्रकृति का नियम है। अपने इस नियम को ध्यान में रखकर प्रकृति ने जंगल से गांव और गांव से शहर बनने को परिवर्तन ही माना। लेकिन अब प्रकृति का नियम रिवर्स गियर में है। शहर अब गांव, गांव अब जंगल की ओर बढ़ने लगे। आबादी बढ़ रही है और पेड़ कम होते जा रहे हैं, क्योंकि आबादी को पांव पसारने के लिए जगह कम पड़ गई है। गा…

दिल्ली में मसूरी सा अहसास

कहीं कहीं तो दिल्ली मसूरी वाला मौसम पेश करती है। 3 मई, 2018 को दिल्ली में इंडिया गेट के पास हरे भरे पेड़ों से भरपूर लॉन में घूमने का मौका मिला। मौसम में थोड़ी ठंडक थी। पेड़ों की बदौलत हवा के स्पर्श और ताजगी ने दिल्ली में मसूरी सा अहसास करा दिया। मैं बड़े सुकून में था, क्योंकि राजपुर से लेकर मसूरी तक के सफर को तपिश वाली दिल्ली में महसूस जो कर रहा था। उस दिन बिना थके चार किमी. से ज्यादा पैदल चलकर मैंने खुद के लिए यह साबित कर दिया कि मुझे यह मौसम पसंद है। मैंने खुद से कहा, दिल्ली का यह वाला मौसम मेरी सेहत सुधारकर उम्र बढ़ा देगा।


पैसों की जरूरत तो बड़े लोगों को है, गरीबों को नहीं

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गरीबों को पैसों की जरूरत नहीं, तभी को कम मेहनताना मिलता हैअमीरों के खर्चे ज्यादा है, इसलिए उनको ज्यादा पैसे चाहिए11 घंटे ड्यूटी, बिना छुट्टी के मात्र 7500 रुपये मासिक वेतन ❃ मैं आज शाम देहरादून से अपने घर लौट रहा था। अंधेरा हो गया था, करीब शाम सवा सात बजे का समय रहा होगा। रास्ते में कुछ महिलाओं ने टैक्सी को रुकने का इशारा किया। ड्राइवर ने चार महिलाओं को कार में बैठा लिया। पीछे वाली सीट पर चार ही महिलाएं बैठ सकती थीं, इसलिए पांचवीं सवारी के लिए जगह नहीं बनी। वहां दस से ज्यादा महिलाएं और बेटियां घर जाने के लिए बस या अन्य सवारी वाहनों का इंतजार कर रहे थे। 
रास्ते में ड्राइवर ने एक फैक्ट्री का नाम लेते हुए पूछा, अभी छुट्टी हुई है। सभी ने हां जी कहते हुए हामी भरी। मैंने पूछा, आप लोगों की ड्यूटी का समय क्या है। पता चला कि सुबह आठ बजे से ड्यूटी शुरू होती है  और शाम सात बजे तक काम करते हैं। मैंने कहा, क्या 15 घंटे ड्यूटी करते हो। इनमें से एक महिला ने जवाब दिया, 15 नहीं 11 घंटे। सुबह आठ से शाम सात बजे तक। मैंने आपको फैक्ट्री का नाम क्यों नहीं बताया, आपने अंदाजा लगा लिया होगा। 

❃ मैंने अपनी गलती …

पेन और पेंसिल

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छुट्टियां खत्म हो गईं। राजू को कल से स्कूल जाना है। शाम को उसने अपना बैग तैयार किया, जिसमें किताबें और कॉपियों के साथ पेंसिल बॉक्स रखा। ऐसा कई बार हो चुका है कि राजू स्कूल बैग में पेंसिल बॉक्स रखना भूल गया। मम्मी तो स्कूल के लिए आने से पहले हर बार याद दिलाती हैं कि पेंसिल बॉक्स रखा या नहीं। 
राजू बैग तैयार करके खेलने चला गया। वहीं बैग में रखे पेन और पेंसिल में इस बात को लेकर बहस होने लगी कि कौन ज्यादा अच्छा है। पेन ने कहा, मुझे स्कूल के साथ दफ्तरों में भी इस्तेमाल किया जाता है। बच्चे हो या बड़े, मेरे बिना किसी का काम नहीं चलता। सबसे बड़ी बात तो यह है कि मैंने जो लिख दिया, वह मिटाया नहीं जा सकता। मैं अपने लिखे पर टिका रहता हूं। मैं तुम्हारे से ज्यादा मजबूत और विश्वास करने लायक हूं पेंसिल। तुम तो केवल छोटे बच्चे इस्तेमाल करते हैं और तुम्हारा लिखा हुआ बार-बार मिटाया जाता है। इसका मतलब यह है कि तुम पर विश्वास नहीं किया जा सकता। तुम अपने लिखे हुए पर दृढ़ नहीं हो, इसलिए तुम्हें कम ही प्रयोग किया जाता है। क्या किसी ने कभी सुना है कि किसी महत्व वाले दस्तावेज पर पेंसिल से हस्ताक्षर किए गए हैं।…

इंसानों से कम नहीं रंग बिरंगे फूल

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बुजुर्ग माली घर के बाहर बागीचे में पौधों की सेवा में व्यस्त हैं। आवाज आती है, बाबा क्या मुझसे बातें करोगे। माली ने पीछे मुड़कर देखा तो डहेलिया का फूल उनसे बातें करने के लिए लालायित है। माली ने कहा, हां कहो, क्या कहना चाहते हो। फूल ने कहा, कल कुछ लोग मुझे देखकर बहुत खुश हो रहे थे। वो मेरी फोटो खींच रहे थे। बार-बार मेरी तारीफ कर रहे थे। अपनी प्रशंसा से मैं काफी खुश हूं। 
मेरी समझ में यह नहीं आ रहा है कि अलग-अलग रंगों और पत्तियों वाले फूलों की उपयोगिता केवल इतनी ही है कि लोग उनको देखकर खुश हों और फिर अपनी राह चले जाएं। हम और क्या कर सकते हैं। हमारा मन भी करता है कि इस बागीेचे से बाहर जाकर देखें कि क्या हो रहा है। हमेशा यह डर भी लगा रहता है कि कोई हमें तोड़कर किसी को गिफ्ट कर देगा या फिर मंदिर में चढ़ा देगा।
माली ने फूल से कहा, संसार में तुम्हारी उपयोगिता इंसानों से कम नहीं है। फूल तुम प्रकृति के आभूषण हो। मैं जब भी तनाव में होता हूं तो तुम्हें देखकर अपने कष्ट भूल जाता हूं। मैं अक्सर यह सोचता हूं कि तुम इतने खूबसूरत कैसे हो। तुम्हारे भीतर तरह-तरह के रंग किसने भरे हैं। तुम्हारा रूप, रंग मुझे…

उत्तराखंड की इस नदी में बन गई पार्किंग

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यह है उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में प्रवेश करते ही नजर आने वाली रिस्पना नदी। रिस्पना जिसको ऋषिपर्णा के नाम से जाना जाता था, कभी देहरादून शहर की लाइफ लाइन कही जाती थी। वर्तमान में यह मृत होती नदियों में एक है। शहर का कूड़ा करकट, नाले, डेरियों की गंदगी इसी नदी में बहाये जा रहे हैं। नदी पर अवैध कब्जों की बाढ़ है। हालांकि राज्य सरकार रिस्पना को स्वच्छ, निर्मल बनाने का दावा कर रही है। यह बता दें कि राजपुर से लेकर पूरे शहर की गंदगी को बटोर कर ला रही यह नदी अब नाला बन चुकी है। अंततः यह सुसुवा नदी में मिल जाती है। सुसुवा आगे चलकर गंगा नदी में मिलती है। कुल मिलाकर रिस्पना के माध्यम से देहरादून शहर की गंदगी गंगा में ही मिल रही है। 


भगवान शिव ने तोड़ा कुबेर का अभिमान

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धन के देवता कुबेर को अपने धन और समृद्धि पर अभिमान हो गया। उन्होंने अपने धन और समृद्धि का बखान करने के लिए सभी देवताओं को दावत पर आमंत्रित करने का मन बनाया। कुबेर ने सोचा कि सभी देवताओं पर उनका अच्छा प्रभाव जमेगा। सभी को लगेगा कि कुबेर जैसा कोई नहीं है।

 उन्होंने कैलाश पर्वत पहुंचकर भगवान शिव को आमंत्रित किया। भगवान शिव कुबेर के संरक्षक है। उन्होंने ही कुबेर को उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर वरदान दिया था कि उनकी संपत्ति कभी कम नहीं होगी, भले ही कितना ही खर्च करते रहें। भगवान शिव समझ गए कि कुबेर अभिमानी हो गए हैं।

भगवान शिव ने कुबेर से कहा कि वह दावत में नहीं आ सकते। वह अपने पुत्र श्रीगणेश को भेज देंगे। कुबेर निराश होकर वापस लौट गए। कुबेर सोचने लगे कि अगर भगवान शिव मेरे महल में आते तो मेरी प्रतिष्ठा बढ़ जाती। अगर भगवान शिव के परिवार से कोई भी दावत में नहीं आएंगे तो मेरा दावत करने का उद्देश्य ही सफल नहीं होगा।

कुबेर ने भव्य आयोजन किया था। सभी देवताओंं को दावत से पहले विशाल सभागार में सम्मान के साथ बैठाया गया। कुबेर ने अपनी संपत्ति और धन को दिखाने का कोई अवसर नहीं छोड़ा। मुख्य अतिथि श्री गणे…